"आपकी वृंदावन यात्रा के लिए सर्वश्रेष्ठ शुरुआती योजना यहाँ दी गई है:
१. आगमन और तैयारी (Arrival & Preparation):
यदि आप अक्टूबर के बाद यात्रा कर रहे हैं, तो सुबह जल्द से जल्द (अधिकतम 5:00 बजे तक) वृंदावन पहुँचने का प्रयास करें।
प्रेम मंदिर के आस-पास का क्षेत्र ठहरने के लिए सबसे अच्छा है; यहाँ किसी भी होटल या होमस्टे में अपना सामान (luggage) रखें।
२. परिक्रमा आरंभ और अनुष्ठान (Parikrama Start & Ritual):
सामान रखने के बाद आप परिक्रमा शुरू कर सकते हैं।
प्रेम मंदिर से सीधे बांके बिहारी मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर, इस्कॉन मंदिर से पहले आने वाले चौराहे पर रुकें।
अपनी श्रद्धा अनुसार वृंदावन की रज (मिट्टी) माथे पर लगाएँ और दंडवत प्रणाम करें।
यहाँ से बाएँ (Left) तरफ की सड़क से परिक्रमा शुरू करें।
३. परिक्रमा मार्ग पर दर्शन (Darshan on the Route):
सबसे पहले, आपको कालियादह मंदिर और घाट के दर्शन होंगे।
इसके बाद, मदन मोहन मंदिर में दर्शन करें।
आगे बढ़ने पर, गेट नंबर 2-3 से आप राधा-गिरिधर मंदिर पहुँच सकते हैं, जहाँ सुबह लगभग 6:00 से 6:30 बजे के बीच मंगला आरती और दर्शन होते हैं।
यहाँ से निकलने के बाद, आप राधा रमण मंदिर में भी इसी समय के आसपास आरती और दर्शन कर सकते हैं।
इसके बाद, बांके बिहारी मंदिर आएगा, जहाँ पहला दर्शन 8:30 बजे होता है।
इस मार्ग पर केशव घाट और दो-तीन अन्य घाट भी आएँगे।"
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